Friday, 23 December 2011

लालू ने कहा की मेरे पैदा होने से पहले ही अंग्रेज भाग गये थे

लोकसभा में सरकार की ओर से पेश किए बहु-प्रतीक्षित लोकपाल विधेयक का राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कड़ा विरोध किया है। लालू ने इस बात के लिए सरकार का आभार जताया कि उनकी मांग को मानते हुए सरकार ने लोकपाल में अल्पसंख्यक आरक्षण की व्यवस्था कर दी है। लेकिन लोकपाल बिल को विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही लाया जाना चाहिए। बिल को हड़बड़ी में लाया जा रहा है।  लालू ने सरकार को सलाह दी कि वो बीजेपी के बहकावे में न आए। लालू ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि सुषमा की  सोच गलत है। लोकपाल कोई सरकारी नौकरी नहीं है। जो आरक्षण का गलत उपयोग होगा। लालू के मुताबिक मौजूदा लोकपाल बिल आनन-फानन में लाया गया है।
अन्ना पर हमला करते हुए लालू ने कहा कि ये देश आंदोलन से नहीं चलता है। अन्ना के मुताबिक लोकपाल बिल नहीं बन सकता। कानून बनाना संसद का काम है। आंदोलन के डर से कोई गलत लोकपाल बिल नहीं बननी चाहिए। लालू टीम अन्ना पर कड़ा वार करते हुए कहा कि ये हमें नचा रहे हैं। ये लोग लोकतंत्र को खत्म कर देंगे।
उन्होंने कहा कि वो सशक्त लोकपाल बिल का स्वागत करते हैं लेकिन ये बिल सशक्त नहीं है। इसमें चारों तरफ से कैंची चलाई गई है। इससे भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा। बिल सवाल उठाते हुए लालू ने कहा कि अगर पूर्व सांसद के खिलाफ सात साल बाद भी कोई शिकायत करता है तो उनके खिलाफ इस लोकपाल बिल में कार्रवाई का प्रावधान है। ये किसके कहने पर डाला गया, ये मांग तो टीम अन्ना ने भी नहीं की थी। 
लालू ने साफ शब्दों में  कहा कि न्यायपालिका लोकपाल से बाहर होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि मीडिय़ा को लोकपाल के दायरे में क्यों लाया जा रहा है। साथ ही लालू ने प्रधानमंत्री और सीबीआई को लोकपाल से बाहर रखने की वकालत की।
आखिर में लालू ने कहा कि इस बिल को दोबारा स्टैंडिग कमेटी के पास भेजना चाहिए। लालू ने कहा सांसदों को गद्दार कहा जाता है। लालू ने मजाक करते  हुए कहा कि ‘हमारा जन्म 1948 में हुआ, हमारे आने से पहले अंग्रेज भाग गया’।

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